Sunday, 8 November 2015

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच्.............,..

भगवान राम ने हनुमानजी को जब रावण के पास भेजा, तो उसके पीछे उनका उद्देश्य क्या था ? लंका का रोगग्रस्त समाज, मोहग्रस्त रावण स्वथ्य हो जाय। लंका का सारा समाज रूग्ण है और उन सबके मूल में है रावण। गोस्वामीजी रावण को मोह का प्रतीक मानते हैं। समस्त व्याधियों के मूल में मोह है और समस्त राक्षसों के मूल में रावण। रावण सहित लंका का सारा समाज रोगग्रस्त है और हनुमानजी हैं उत्कृष्टतम वैद्य। वे तो भगवान शंकर के अवतार हैं न। किसी ने गोस्वामीजी से पूछ दिया कि हनुमानजी तो वैद्य बनकर गये थे, फिर उन्होंने लंका को क्यों जला दिया ? तो गोस्वामीजी बड़े भावनात्मक पद्धति से कहते हैं कि यह हनुमानजी की बड़ी विलक्षण चिकित्सा पद्धति है। वे लंका को जलाकर औषध तैयार कर रहे थे। कैसे ? वे बोले आयुर्वेदशास्त्र की मान्यता है कि जब साधारण जडी-बूटियों से काम न चले, तब सोना-रत्न आदि का भस्म बनाकर रोगी को देना चाहिए। उससे रोगी स्वथ्य हो जाता है। भगवान राम ने हनुमानजी से यही कहा कि भई ! तुमसे अच्छा वैद्य और कौन होगा ? विष में भी अमृतत्व खोज निकालने वाले उत्कृष्टतम वैद्य तो भगवान शंकर ही हैं।

No comments:

Post a Comment