प्रभु की कृपादृष्टि बालि और सुग्रीव दोनों पर है। वे दोनों का कल्याण कर रहे हैं। एक ओर सुग्रीव हैं, जिन्हें भगवान राम युद्ध के लिए प्रेरित कर रहे हैं और उनकी दुर्बलताओं को धीरे - धीरे दूर कर रहे हैं और दूसरी ओर तो बड़ी अनोखी बात देखने में आती है। सुग्रीव को वे यह कहकर युद्ध करने भेज देते हैं कि बालि को वे मारेंगे, पर उस युद्ध में जब बालि सुग्रीव पर प्रहार करता है तब भगवान कोई हस्तक्षेप नहीं करते। बड़ा अनोखा कार्य है प्रभु का। बेचारे सुग्रीव बालि के मर्मान्तक प्रहार से अत्यधिक कष्टिक होकर अपने स्वभाव के अनुसार भागे और भगवान के पास आकर उलाहना देते हुए बोले कि महाराज! आपने तो कहा था - मैं एक ही बाण से बालि को मारूँगा , पर बालि मुझ पर प्रहार करता रहा और आपने उसे नहीं मारा, तो इस पर भगवान ने कहा कि समस्या यह हो गयी- मैं पहचान नहीं पाया कि कौन बालि है और कौन सुग्रीव। इसलिए मैंने नहीं मारा। यह वेदांत का ब्रह्म है। यहाँ पर भगवान ने बालि को अपने तीन रूपों का दर्शन कराया- वेदांत का ब्रह्म, कर्म सिध्दांत का ईश्वर और भक्ति का भगवान। और वे इन तीन रूपों में से किसी एक रूप को चुनने की उसे स्वतंत्रता दे देते हैं कि इनमें से जो रूप तुम्हें अभीष्ट हो उसे स्वीकार कर लो।
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