Thursday, 31 December 2015

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच्..........

भगवान ने यह जो तीन रूप बालि को दिखाया, इसका अभिप्राय क्या है ? वे बालि को अवसर देते हैं। बालि कहता है कि ब्रह्म सम है। भगवान सुग्रीव को भेजकर उसे अवसर देते हैं कि अगर तुम समझते हो कि ब्रह्म सम है तो तुम भी समत्व में आरूढ़ हो जाओ, पर तुम्हारे अन्तःकरण में तो भेदबुद्धि है। इस भेदबुद्धि से प्रेरित होकर तुमने जो कर्म किया, इसका परिणाम भी मैंने कर्मसिद्धान्त के ईश्वर के रूप में तुम्हें दे दिया और अब अंदर तुम्हें भक्ति का भगवान चाहिए तो लो मैं तुम्हारे सामने खड़ा हूं। भक्ति भगवान की कृपा का पक्ष है, करुणा का पक्ष है। ज्ञान और कर्म का ईश्वर निराकार है, पर भक्ति का ईश्वर साकार है। वहाँ छिपना नहीं, प्रत्यक्ष होना ही ईश्वर का स्वरूप है। करुणासागर भगवान बालि के सामने खड़े हो गये। बालि पहले तो शास्त्रार्थ करता है, बड़ा तर्क - वितर्क करता है, पर जब भगवान के चुनाव करने का अवसर आया, तब उसने वेदांत के ब्रह्म और कर्मसिद्धान्त के ईश्वर के स्थान पर भक्ति के भगवान का ही चुनाव किया।

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