Saturday, 26 December 2015

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच्.........

जब तारा ने बालि से कहा कि सुग्रीव आपको जो चुनौती दे रहा है, इस घटना के पीछे बल किसका है ? जरा इस पर तो ध्यान दीजिए। तो बालि ने कहा कि मैं जानता हूँ कि इसके पीछे भगवान श्रीराम का बल है। तब तारा ने कहा कि तब तो आपको और भी सावधान रहना चाहिए। उसने कहा कि तुम राम का नाम सुनकर घबरा गयीं, तुम नहीं जानती पर मुझे राम का ज्ञान है। तुम भीरू हो, डर जाती हो, तुम्हें सच्चा ज्ञान नहीं है। भगवान राम तो समदर्शी हैं। भगवान राम के समत्व का प्रतिपादन करके जब बालि चलने लगा तो गोस्वामीजी से किसी ने कहा कि वेदांत की कितनी बढ़िया बात आज बालि ने कही है, कम से कम आज तो इसे ज्ञानी की उपाधि दे दीजिए। गोस्वामीजी ने कहा कि यह ज्ञानी नहीं है ? बोले - यह महा अभिमानी है। अभिप्राय यह है कि अगर उसे सच्चा ज्ञान हो जाता तो समझ लेता कि वस्तुतः सुग्रीव में और मुझमें रंचमात्र भी भेद नहीं है। ज्ञान हो जाने पर तो उसमें ब्रह्म का समत्व आ जाता, पर उसमें यह वृत्ति आ गयी कि हम सुग्रीव को सतायेंगे और भगवान कुछ नहीं बोलेंगे।

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