Wednesday, 13 April 2016

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच ..........

किसी ने मुझसे कहा - नारद को जब अहंकार हो गया, तो भगवान भाषण दे देते कि अहंकार कितना बुरा है और यह कह देते कि नारद, तुम्हें अहंकार नहीं करना चाहिए । इस पर मैंने कहा - भाई ! जो न जाने, उसके सामने भाषण देने में कुछ सार्थकता है । क्या नारद को नहीं पता कि अहंकार  में कितनी बुराई है ? क्या भगवान कहेंगे तभी नारद को यह समझ में आयेगा कि अहंकार कितना बुरा है ? नारद यह सब जानते हैं । इसलिए भगवान ने नारद को समझाने की चेष्टा नहीं की, क्योंकि वे जानते हैं कि शंकरजी द्वारा नारद को समझाकर उनके अर्न्तमन की बुराइयों को दूर करने की चेष्टा की जा चुकी है, पर उससे कोई लाभ नहीं हुआ । भगवान विष्णु ने समझ लिया कि केवल वाणी के द्वारा, प्रवचन के द्वारा, विश्लेषण के द्वारा उनके अर्न्तमन की समस्याओं का समाधान नहीं किया जा सकता ।

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