दाद की तरह ममता रोग होते हुए भी रोग प्रतीत नहीं होता और सुख और दुख दोनों की सृष्टि करता है । वास्तव में हम देखते हैं कि कभी-कभी मनुष्य इस ममता को लेकर स्वयं को अत्यंत सुखी अनुभव करता है । ममता का अर्थ है - ममत्व, मेरापन, वह वस्तु मेरी है, इस व्यक्ति से मेरा संबंध है, वह मेरा है, इत्यादि । इस मेरेपन के कारण व्यक्ति के ह्रदय में जिस लगाव का अनुभव होता है उसी का नाम ममता है । जिनमें हमें ममता होती है, उन्हें जब हम उन्नति करते देखते हैं, तो हमें बड़ी प्रसन्नता होती है । यही एक प्रकार की अनुभूति हो ऐसा नहीं है । यह भी होता है कि जिनसे हमारी ममता हो, यदि वे हमारी इच्छा के विरुद्ध कोई कार्य करते हैं या हमारी भावनाओं का ध्यान नहीं रखते तो हमारे ह्रदय में बड़ी पीड़ा होती है । ममता की इस वृत्ति को रामचरितमानस के विभिन्न प्रसंगों में विविध रूपों में प्रस्तुत किया गया है, हम इसकी चर्चा आने वाले दिनों में करेंगे ।
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