अयोध्या में जो सन्निपात है, उसके महान वैद्य हैं श्रीभरत । वे आते हैं और क्रम से चिकित्सा प्रारंभ करते हैं । आयुर्वेदशास्त्र में तो बड़े विस्तार से इसका वर्णन किया गया है कि अगर कफ, वात और पित्त तीनों ही प्रबल हो गये हों तो उसकी चिकित्सा कहाँ से प्रारंभ करनी चाहिए ? कफ को पहले शान्त करें या पित्त को या वात को ? आयुर्वेद के अनुसार सन्निपात की चिकित्सा में वैद्य की बड़ी कठिन परीक्षा हो जाती है । इसका अभिप्राय यह है कि अगर एक ही धातु विकृत हुई तो वैद्य के सामने कोई कठिनाई नहीं होती । उसकी दवा वह दे देगा और विकृति शान्त हो जाएगी । पर जहाँ कई विकृत्तियाँ एक साथ आ गयी हों, वहाँ तो चुनना ही पड़ेगा कि किस विकृति को दूर करने के लिए किस क्रम का पालन करें । श्रीभरत ने सबसे पहले इसका ही निर्णय किया ।
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