Thursday, 15 June 2017

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच ......

ज्ञान का पक्ष विवेक का पक्ष है । विवेक के पक्ष का अभिप्राय है कि कभी-कभी हमसे अनेक ऐसी ऐसी भूलें होती हैं जो हमारे अज्ञान के कारण, नासमझी के कारण, विवेक शून्यता के कारण होती हैं, तो उसका अभिप्राय है कि मनुष्य के विवेक में भी, मस्तिष्क में भी परिवर्तन होना परम आवश्यक है । मनुष्य की अगर बुद्धि ही पवित्र नहीं होगी, शुद्ध नहीं होगी, अगर वह सत्य को बुद्धि से ठीक-ठीक समझ नहीं लेगा तो फिर व्यक्ति जीवन में धन्यता प्राप्त नहीं कर सकता । ज्ञानी जब मस्तिष्क या बुद्धि पर बल देता है तो उसका अभिप्राय है कि हम सही सही जाने । जानना परम आवश्यक है । क्या सही है क्या नहीं सही है, क्या पवित्र है, क्या अपवित्र है, क्या धर्म है ?

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