आप पढ़ते हैं कि यह रामकथा वह है जिसे भगवान शंकर ने पार्वती को सुनाया, श्रीराम का चरित्र वह है, जिसे काकभुशुण्डिजी ने गरुड़ जी को सुनाया, श्रीराम का चरित्र, जिसे महर्षि याज्ञवल्क्य ने भारद्वाज जी को सुनाया और वही रामकथा जिसे गोस्वामी तुलसीदास जी भाषा के माध्यम से हमें दिया । यद्यपि उन्होंने यही कहा कि मैंने अपने अन्तःकरण के सुख के लिए ही इसका निर्माण किया है, लेकिन उसे सबके लिए समान रूप से उन्होंने सुलभ किया । तो ये चार वक्ता, चार श्रोता, चार घाट या श्रीराम के ये चार भाई - श्रीराम, श्रीभरत, श्री लक्ष्मण, श्री शत्रुघ्न या सुमेरु पर्वत के चार शिखर पर चार वृक्ष, इनका सांकेतिक तात्पर्य क्या है, इसका अभिप्राय क्या है, आने वाले दिनों में इस पर दृष्टि डालेंगे ।
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