Wednesday, 21 June 2017

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच .......

मन, बुद्धि और चित्त तथा अहंकार हमारे आपके अन्तःकरण में चार विभाजित रूप में विद्यमान हैं । प्रत्येक मनुष्य के व्यक्तित्व की बनावट अलग अलग है और उसके अनुकूल ही वे व्यक्ति को उपाय बताते हैं । किसके लिए कौन सा उपाय ठीक है । किससे आप लाभ अनुभव करते हैं । इससे मुझे लाभ हुआ आप ऐसा अनुभव करेंगे तो आपके लिए वह पद्धति ठीक है । जो विभाजन किया है वह चार अंक है । चाहे चार घाट हैं, चाहे चार युग हैं, चाहे अन्तःकरण के चार रूप हैं, चाहे भगवान राम के चार भाई हैं । इस तरह से चार के अंक बहुत बड़ी संख्या में आपको धार्मिक और आध्यात्मिक प्रतीकों में मिलेंगे ।

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