जब गोस्वामीजी की एक सिद्ध संत के रूप में प्रसिद्धि हो गई, और उनके नाम की सर्वत्र जयध्वनि होने लगी तो लोग उनसे आकर पूछते थे कि महाराज यह किस मंत्र जप से हुआ । गोस्वामीजी ने कहा कि यह रामनाम से हुआ - इस नाम को तो हम पहले से जानते थे, यह भी कोई बात हुई ! आप असली बात छिपा रहे हैं । गोस्वामीजी ने कहा कि नहीं, नहीं ! यदि मैंने कुछ छिपाया हो तो जीभ गलकर नष्ट हो जाय । मैंने जीवन में जो कुछ पाया, वह रामनाम के द्वारा ही पाया है । - यह रामनाम आपने किस शास्त्र से पाया ? क्या आपने वेद-पुराणों का अध्ययन करके यह निष्कर्ष निकाला ? उन्होंने कहा - वेद पुराण एवं शास्त्रों में समस्या थी कि अलग-अलग पन्थों के अलग-अलग मत थे, अलग-अलग सिद्धांत थे । सर्वत्र भ्रम और झगड़े की स्थिति थी । इसलिए गुरुजी ने मुझे जो 'रामनाम' का मन्त्र दिया था वही मेरे काम आया । गुरुजी ने कहा था कि तू रामनाम जप ! और उसी अनुभव से मैं कह सकता हूँ कि आप जो कुछ भी पाना चाहते हैं, वह रामनाम से प्राप्त कर सकते हैं । रामनाम में ऐसी दिव्य शक्ति है ।
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