Monday, 21 August 2017

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच ......

भगवान राम का जन्म त्रेतायुग में होता है और भगवान कृष्ण का जन्म द्वापर में होता है । काल की दृष्टि से इतनी दूरी होने पर भी हम मानते हैं कि भगवान राम और भगवान कृष्ण एक ही हैं । और दोनों में जो अन्तर है वह यह कि भगवान राम के हाथों में धनुष-बाण है और भगवान कृष्ण के हाथ में वंशी है । भगवान कृष्ण की वंशी की महिमा बड़ी अद्भुत है । ब्रज के संतों और भक्तों ने उस महिमा का गायन किया है । कवियों ने वंशी की मधुरता पर अनेकानेक पंक्तियाँ लिखी हैं । पर यह वंशी भगवान कृष्ण के हाथ में केवल ब्रजभूमि, वृन्दावन की भूमि में दिखाई देती है । भगवान कृष्ण उसके बाद मथुरा जाते हैं, द्वारका जाते हैं, कुरुक्षेत्र के युद्ध में जाते हैं, पर वहाँ कहीं भी उनके कर-कमलों में वंशी दिखाई नहीं देती । वृन्दावन की जो भावभूमि है, वह रसमय भूमि है । वहाँ वंशी से बढ़कर तो कोई और वस्तु हो ही नहीं सकती । वंशी से दिव्य अनुराग और प्रेम का ऐसा भावरस प्रवाहित होता है कि लगता है जैसे यह वंशी का रस नहीं है, मानो ब्रह्म ही अपने अधरों से वंशी को लगा कर अपनी ह्रदय की मधुरता को, प्रीति को गोपियों के अन्तःकरण में प्रविष्ट करा देते हैं । ब्रज के भक्त भगवान कृष्ण को ब्रज को छोड़कर कहीं अन्यत्र देखने की कल्पना भी नहीं कर सकते ।

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