Monday, 7 August 2017

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच ......

हनुमानजी प्रभु से निवेदन करते हैं कि सुग्रीव दीन हैं, अतः आप उनकी दीनता को मिटाकर उसे भयमुक्त करें । प्रभु कह सकते हैं कि हनुमान ! तुम सुग्रीव को यहाँ बुला लो ! हनुमानजी ने कहा - नहीं प्रभु ! आपको ही सुग्रीव के पास चलना होगा । हनुमानजी मानो कहना चाहते हैं कि संसार में भी रोगी यदि चलने-फिरने के योग्य हो तो वह स्वयं डाक्टर या वैद्य के पास जाता है पर यदि वह चलने में भी असमर्थ हो तो ऐसी स्थिति में वैद्य को ही रोगी के पास जाना पड़ता है । सुग्रीव की भी स्थिति यही है । वह भागते-भागते इतना थक गया है कि आपके पास आने की शक्ति उसमें नहीं है, अतः आप ही मेरी पीठ पर बैठकर उसके पास चलें । हनुमानजी ने भगवान राम और लक्ष्मणजी को अपनी पीठ पर बैठाकर सुग्रीवजी के पास पहुँचा दिया । सन्तों का कार्य ही भगवान के पास पहुँचाना है ।

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