गोस्वामीजी ने भगवान से प्रार्थना करते हुए कहा कि प्रभु ! तीन बातें मेरे जीवन में आ जायँ, ऐसा मैं चाहता हूँ । प्रभु ने कहा कि बताओ क्या-क्या चाहते हो । गोस्वामीजी कहते हैं - सुत की प्रीति, आप मुझे एक पिता के समान प्रीति दीजिए, मुझे अपना बेटा बना लीजिए । दूसरी बात - प्रतीति मीत की, आप एक मित्र-जैसा विश्वास दीजिए । भगवान ने कहा - और क्या चाहिए ? प्रेम और विश्वास तो तुमने माँग ही लिया । वे बोले - महाराज ! इन दोनों से ही काम नहीं चलेगा । आप मुझे तीसरी वस्तु - डर दीजिए । जैसे प्रजा को राजा से डर लगता है वैसा ही डर मुझे आपसे लगता रहे । बात बड़ी विचित्र-सी लगती है पर यह डर ही प्रेम और विश्वास का कवच है ।
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