Sunday, 20 August 2017

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच ......

भगवान राम का अवतार त्रेतायुग में हुआ और गोस्वामीजी का जन्म आज पाँच सौ वर्ष पहले हुआ । इस प्रकार भगवान राम और गोस्वामीजी के काल में एक लम्बी दूरी है । और गोस्वामीजी के काल में तथा वर्तमान समय में भले ही दो युगों का अन्तर न हो पर पाँच सौ वर्षों का एक लम्बा अन्तराल तो है ही । पर हम कहते हैं कि गोस्वामीजी और उनके द्वारा भगवान के चरित्र की जो गाथा 'रामचरितमानस' के रूप में प्रकट हुई वे दोनों आज भी प्रासंगिक हैं । इसका तो यही अर्थ है कि गोस्वामीजी ने जिन भगवान श्रीराम के चरित्र का वर्णन किया, उस चरित्र और वर्णन में मानो काल और व्यक्तित्व की दूरियाँ समाप्त हो जाती हैं ।

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