हम देखते हैं कि व्यक्ति को पग-पग पर अर्थ की आवश्यकता होती है । अब ऐसी स्थिति में, शास्त्रों के उन उद्धरणों को सुना दिया जाय जिनमें अर्थ की निन्दा की गई है तो क्या इससे व्यक्ति की समस्या का समाधान हो जायेगा ? इससे समस्या का समाधान होने के स्थान पर उल्टे व्यक्ति के मन में एक भ्रम की स्थिति उत्पन्न होने की सम्भावना अधिक है । यही बात काम के विषय में भी कही जा सकती है । और यह संकेत 'मानस' में कई पात्रों के माध्यम से आपको मिलेगा ।
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