हनुमानजी के जन्म के समय से ही उनसे एक अद्भुत कथा जुड़ी हुई है । कथा आती है, श्री हनुमान जी का जन्म सायंकाल हुआ और दूसरे दिन प्रातःकाल होते-होते उन्हें बड़े जोर की भूख लग आई । उस समय उन्होंने उगते हुए लाल रंग के सूर्य को देखा । उन्हें वह एक फल प्रतीत हुआ, अतः उन्होंने आकाश में एक छलाँग लगाई और सूर्य को अपने मुँह में ले लिया । पूछा जा सकता है कि उस पर्वत के आसपास क्या फलवाले वृक्षादि नहीं थे जो उन्हें अपनी भूख मिटाने के लिए सूर्य को ही फल समझकर ग्रहण करना पड़ा । आइए, हम विचार करें कि यह कौन-सा फल है जिसे हनुमानजी पाना चाहते हैं । संसार में हम देखते हैं कि कोई व्यक्ति धन कमाने के लिए पुरुषार्थ करता है । उसके जीवन का लक्ष्य अर्थ रूपी फल को प्राप्त करना है । कोई दूसरा व्यक्ति 'काम' के बिना अपने जीवन को अधूरा मानता है । पर हनुमानजी के जीवन में 'अर्थ और काम' फल की कोई आकांक्षा नहीं है । वे सूर्य को फल समझते हैं इसके पीछे एक विशेष संकेत है । सूर्य प्रकाश-पुञ्ज हैं, प्रकाश के साक्षात देवता हैं । सूर्य ज्ञान के प्रतीक हैं । कहा जा सकता है कि हनुमानजी में तो बस 'ज्ञान' की भूख है । इसलिए उन्हें एकमात्र ज्ञान का फल ही अपनी ओर आकृष्ट करता है । ऐसा महान चरित्र है हनुमानजी का ।
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