......कल से आगे......
यही जुगनू की मनोवृत्ति है कि जब कोई नहीं दिखाई देगा, तब हम दिखाई देंगे। इसका अभिप्राय यह है कि जब किसी की कीर्ति प्रकाशित होती है, (कीर्ति की तुलना प्रकाश से की जाती है ) तो वह निरन्तर यही चाहता है कि संसार में और सारे प्रकाश समाप्त हो जायें और केवल मैं चमकता रहूँ। वह नहीं चाहता कि किसी और की चमक बढ़े, क्योंकि उस चमक में मेरा महत्व, मेरी महिमा कम हो जायेगी। मानस में गोस्वामीजी कहते हैं कि कीर्ति का उद्देश्य अपने आपको चमकाना नहीं, बल्कि दूसरों को प्रकाश देना होना चाहिए और इसी तरह कविता की व्याख्या करते हैं कि कविता का उद्देश्य क्या होना चाहिए ? कविता का उद्देश्य होना चाहिए विश्व का हित। एक कवि यदि अपने काव्य का कौशल प्रदर्शित करके अपने को प्रतिष्ठित करना चाहता है, महिमा से मण्डित होना चाहता है, तो उस कविता के द्वारा उसके जीवन में कोई लाभ नहीं होगा। कविता का उद्देश्य तो यह होना चाहिए कि उससे दूसरे लोगों को भी प्रेरणा प्राप्त हो। जो कविता समाज का हित करे वही कविता है। इसी तरह गोस्वामीजी कहते हैं कि सम्पत्ति वह नहीं है जो अपने पास या बैंक के अपने खाते में जमा हो। सम्पत्ति तो वही है जिसका प्रयोग संसार के कल्याण के लिए, लोगों के कल्याण के लिए एवं जनसेवा के लिए हो।
यही जुगनू की मनोवृत्ति है कि जब कोई नहीं दिखाई देगा, तब हम दिखाई देंगे। इसका अभिप्राय यह है कि जब किसी की कीर्ति प्रकाशित होती है, (कीर्ति की तुलना प्रकाश से की जाती है ) तो वह निरन्तर यही चाहता है कि संसार में और सारे प्रकाश समाप्त हो जायें और केवल मैं चमकता रहूँ। वह नहीं चाहता कि किसी और की चमक बढ़े, क्योंकि उस चमक में मेरा महत्व, मेरी महिमा कम हो जायेगी। मानस में गोस्वामीजी कहते हैं कि कीर्ति का उद्देश्य अपने आपको चमकाना नहीं, बल्कि दूसरों को प्रकाश देना होना चाहिए और इसी तरह कविता की व्याख्या करते हैं कि कविता का उद्देश्य क्या होना चाहिए ? कविता का उद्देश्य होना चाहिए विश्व का हित। एक कवि यदि अपने काव्य का कौशल प्रदर्शित करके अपने को प्रतिष्ठित करना चाहता है, महिमा से मण्डित होना चाहता है, तो उस कविता के द्वारा उसके जीवन में कोई लाभ नहीं होगा। कविता का उद्देश्य तो यह होना चाहिए कि उससे दूसरे लोगों को भी प्रेरणा प्राप्त हो। जो कविता समाज का हित करे वही कविता है। इसी तरह गोस्वामीजी कहते हैं कि सम्पत्ति वह नहीं है जो अपने पास या बैंक के अपने खाते में जमा हो। सम्पत्ति तो वही है जिसका प्रयोग संसार के कल्याण के लिए, लोगों के कल्याण के लिए एवं जनसेवा के लिए हो।
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