गोस्वामीजी कहते हैं कि गंगा का जीवन-दर्शन हमारे लिए जीवन का आधार होना चाहिए । इसलिए जहाँ पर गंगा की महिमा बतायी गयी है, वहाँ पर एक सांकेतिक सूत्र भी दिया गया है । गंगा किनारे जितने गांव और शहर हैं, वे सभी तीर्थ हैं, लेकिन इनमें तीन तीर्थों का उल्लेख विशेष रूप से किया गया हैं और वे बड़े महत्व के हैं - हरिद्वारे प्रयागे च गंगासागरसंगमे - गंगा के किनारे हरिद्वार, प्रयाग और गंगासागर ये तीन सर्वश्रेष्ठ तीर्थ हैं । ऐसा कहकर अन्य तीर्थों की निन्दा नहीं की गयी है, बल्कि इन तीनों का चुनाव बड़े सांकेतिक रूप से किया गया है, क्योंकि गंगा हमारे लिए केवल एक नदी नहीं, अपितु हमारे समस्त धर्म और संस्कृति का जो तत्व है, हमारे जीवन-दर्शन का जो तत्व है, उन सबको हमारे ऋषियों ने उन्हीं के माध्यम से पुराणों में व्यक्त किया है । उसमें जो तीन स्थानों का प्रतीक चुना गया है, बड़े महत्व का है । पहला स्थान चुना गया हरिद्वार । एक सज्जन ने कहा कि ऋषि-मुनि बड़े कुशल वर्णनकर्ता थे । उन्होंने एक प्रकार से भौगोलिक वर्णन किया - हरिद्वार से प्रारंभ, प्रयाग मध्य और गंगासागर में समुद्र - मिलन पर समाप्ति, पर तत्त्वतः यह ठीक नहीं है, क्योंकि गंगा का उद्भव हरिद्वार से नहीं हुआ है । गंगा तो गंगोत्री से निकलती है ।
.....आगे कल .......
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