....... कल से आगे.........
गंगा तो गंगोत्री से निकलती है । ऐसी स्थिति में इस श्लोक में यह कहना चाहिए था कि गंगा का सर्वश्रेष्ठ तीर्थ गंगोत्री है, लेकिन गंगोत्री का महत्व अधिक है या हरिद्वार का ? वैसे तो जो लोग गंगोत्री की यात्रा करके आते हैं, उनको बड़ी धन्यता और गौरव की अनुभूति होती हैं । उसकी तुलना में हरिद्वार जाना सरल है, पर पुराणों या ऋषियों ने बड़ी अनोखी बात कही । उन्होंने गंगोत्री को बहुत कम महत्व दिया और हरिद्वार को बड़ा बता दिया । क्यों ? उन्होंने कहा कि दोनों में यह अन्तर हैं कि गंगा को गंगोत्री में पाने के लिए बड़ा कठिन परिश्रम करना पड़ता है । बड़ी कठिनाई से ऊपर चढ़ने पर वे प्राप्त होती हैं, लेकिन हरिद्वार में यह विशेषता है कि वहाँ गंगा स्वयं नीचे उतरकर आ जाती है और व्यक्ति को सुलभता से प्राप्त हो जाती हैं, किन्तु मनुष्य की एक बड़ी विचित्र भावना है कि जो वस्तु उसे कठिनाई से मिलती है उसी को वह अधिक महत्व देता है । इसलिए जिस तीर्थ की यात्रा जितनी ही कठिन है, उसे व्यक्ति उतना ही महत्व देता है । जिसकी यात्रा जिसकी यात्रा जितनी ही सुलभ है, उसे उतना ही कम महत्वपूर्ण मानता है, लेकिन शास्त्रकारों ने कहा कि जिनमें सामर्थ्य हो वे गंगोत्री जाकर गंगा स्नान करें और धन्यता तथा गौरव की अनुभूति करें, पर गंगा का पहला तत्व हरिद्वार है अर्थात जहाँ उनकी सुलभता का सुख है ।
गंगा तो गंगोत्री से निकलती है । ऐसी स्थिति में इस श्लोक में यह कहना चाहिए था कि गंगा का सर्वश्रेष्ठ तीर्थ गंगोत्री है, लेकिन गंगोत्री का महत्व अधिक है या हरिद्वार का ? वैसे तो जो लोग गंगोत्री की यात्रा करके आते हैं, उनको बड़ी धन्यता और गौरव की अनुभूति होती हैं । उसकी तुलना में हरिद्वार जाना सरल है, पर पुराणों या ऋषियों ने बड़ी अनोखी बात कही । उन्होंने गंगोत्री को बहुत कम महत्व दिया और हरिद्वार को बड़ा बता दिया । क्यों ? उन्होंने कहा कि दोनों में यह अन्तर हैं कि गंगा को गंगोत्री में पाने के लिए बड़ा कठिन परिश्रम करना पड़ता है । बड़ी कठिनाई से ऊपर चढ़ने पर वे प्राप्त होती हैं, लेकिन हरिद्वार में यह विशेषता है कि वहाँ गंगा स्वयं नीचे उतरकर आ जाती है और व्यक्ति को सुलभता से प्राप्त हो जाती हैं, किन्तु मनुष्य की एक बड़ी विचित्र भावना है कि जो वस्तु उसे कठिनाई से मिलती है उसी को वह अधिक महत्व देता है । इसलिए जिस तीर्थ की यात्रा जितनी ही कठिन है, उसे व्यक्ति उतना ही महत्व देता है । जिसकी यात्रा जिसकी यात्रा जितनी ही सुलभ है, उसे उतना ही कम महत्वपूर्ण मानता है, लेकिन शास्त्रकारों ने कहा कि जिनमें सामर्थ्य हो वे गंगोत्री जाकर गंगा स्नान करें और धन्यता तथा गौरव की अनुभूति करें, पर गंगा का पहला तत्व हरिद्वार है अर्थात जहाँ उनकी सुलभता का सुख है ।
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