कीरति भनिति भूति भलि सोई।
सुरसरि सम सब कहँ हित होई।।
गोस्वामीजी ने कहा कि कीर्ति, कविता और सम्पत्ति तीनों वस्तुओं की श्रेष्ठता की एक ही कसौटी है कि उस वस्तु के द्वारा किसी एक व्यक्ति का हित होता है या सबका हित होता है। इसलिए उन्होंने इसके संदर्भ में गंगा का दृष्टांत दिया। गंगाजी की विलक्षणता यह है कि वे ऊपर से उतरकर नीचे आती हैं, पर उस नीचे आने का उद्देश्य क्या है ? जब गंगा ब्रह्मा के कमण्डलु में थीं, तब वे देवलोक में, ब्रह्मलोक में थी, लेकिन वे देवलोक से उतरकर मृत्युलोक में कैलाश पर्वत पर आ गयीं, फिर उतरकर हिमाचल की चोटियों पर आ गयीं और वहाँ से उतरकर पृथ्वी पर आ गयीं। इसके बाद पृथ्वी पर बहती हुई वे समुद्र की ओर जा रही हैं। इन सबके पीछे उनका क्या उद्देश्य है ? इसके पीछे उनका उद्देश्य यही है कि वे पापियों का उद्धार करने के लिए आती हैं, लोककल्याण के लिए अपने आपको नीचे उतारकर सबकी सेवा में लगा देती हैं। यही गंगाजी के अवतरण का उद्देश्य और उनका सबसे बड़ा गौरव है।
सुरसरि सम सब कहँ हित होई।।
गोस्वामीजी ने कहा कि कीर्ति, कविता और सम्पत्ति तीनों वस्तुओं की श्रेष्ठता की एक ही कसौटी है कि उस वस्तु के द्वारा किसी एक व्यक्ति का हित होता है या सबका हित होता है। इसलिए उन्होंने इसके संदर्भ में गंगा का दृष्टांत दिया। गंगाजी की विलक्षणता यह है कि वे ऊपर से उतरकर नीचे आती हैं, पर उस नीचे आने का उद्देश्य क्या है ? जब गंगा ब्रह्मा के कमण्डलु में थीं, तब वे देवलोक में, ब्रह्मलोक में थी, लेकिन वे देवलोक से उतरकर मृत्युलोक में कैलाश पर्वत पर आ गयीं, फिर उतरकर हिमाचल की चोटियों पर आ गयीं और वहाँ से उतरकर पृथ्वी पर आ गयीं। इसके बाद पृथ्वी पर बहती हुई वे समुद्र की ओर जा रही हैं। इन सबके पीछे उनका क्या उद्देश्य है ? इसके पीछे उनका उद्देश्य यही है कि वे पापियों का उद्धार करने के लिए आती हैं, लोककल्याण के लिए अपने आपको नीचे उतारकर सबकी सेवा में लगा देती हैं। यही गंगाजी के अवतरण का उद्देश्य और उनका सबसे बड़ा गौरव है।
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