Monday, 4 January 2016

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच्...........

बालि का देहाभिमान मिट गया। उसकी देह के प्रति ममता मिट गयी। अहंता और ममता दोनों मिट गये, यही मुक्ति का सच्चा स्वरूप है, लेकिन बालि तो इस मुक्ति से भी आगे बढ़ गया। बड़ी अनोखी बात है। अमरता का क्या अर्थ है ? देह के प्रति अहंता और ममता ही तो मृत्यु है। जो इन दोनों से मुक्त हो गया, वह मृत्यु से भी मुक्त हो गया, अमर हो गया। बालि तो मुक्त हो ही गया, पर साथ ही उसने भगवान को बाँध लिया। भक्ति की यही विलक्षणता है। ज्ञानी भी मुक्त होता है पर भक्त की विशेषता यह है कि वह स्वयं मुक्त होने के साथ-साथ भगवान को बाँध भी लेता है।

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