Tuesday, 1 March 2016

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच ............

दूसरी ओर हैं श्रीसीताजी । उन्होंने भगवान राम को पाया । उनका मार्ग कौन सा है ? उनका मूल प्रेरक कौन है ? श्रीसीताजी अपने चरित्र के माध्यम से दिखा देती हैं कि पार्वतीजी ही भगवान राम को पाने का माध्यम हैं । श्रीसीताजी पार्वतीजी का पूजन करने चलीं । वे वाटिका में आकर स्नान करती हैं और मंदिर में जाकर पार्वतीजी का पूजन करती हैं । वहाँ उन्हे श्रीराम के आगमन की सूचना मिलती है और अंत में श्रीराम का दर्शन होता है । दर्शन के बाद वे पुनः पार्वतीजी से प्रार्थना करती हैं और पार्वती उन्हें आशीर्वाद देती हैं कि तुम्हें राम मिलेंगे । यह क्रम का निर्वाह है कि अगर भक्ति पाना हो तो संत की कृपा चाहिए और ज्ञान पाना हो तो ? पार्वती कौन है ? वे हैं मूर्तिमती श्रद्धा और ज्ञान प्राप्त करने के लिए सूत्र दिया गया - 'श्रद्धावाल्लभते ज्ञानम्'। ज्ञान उन्हें प्राप्त होता है, जिनके अन्तःकरण में श्रद्धा है ।

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