Friday, 25 March 2016

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच ..........

दक्ष ने एक बहुत बड़ा यज्ञ किया । उस यज्ञ में उन्होंने समस्त ऋषि-मुनि और देवताओं को आमंत्रित किया, केवल शंकरजी को नहीं बुलाया । सारे देवता दक्ष के पक्षधर थे । ऋषि-मुनियों को भी लगता था कि शिव का आचरण वैदिक परम्परा के अनुकूल नहीं है । किसको इस दक्षयज्ञ का आचार्य बनाया गया ? भृगु जैसे महापुरूष को । अब कथा में तो यह भी कहा गया है कि भरी सभा में जब दक्ष ने शिवजी की निन्दा की, तो भृगु ने भी दाढ़ी हिला-हिलाकर बड़ी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि दक्ष ! तुम बिल्कुल ठीक कहते हो । दक्ष ने शंकरजी को यज्ञ में नहीं बुलाया, इसलिए शंकरजी तो नहीं आये, पर साथ ही निमंत्रण पाने के बावजूद दो अन्य देवता भी नहीं आये । वे कौन थे ? बोले - शंकरजी को तो निमंत्रण ही नहीं मिला था, लेकिन ब्रह्मा और विष्णु निमंत्रण पाकर भी नहीं आये थे । इस प्रकार उस यज्ञ में सब तो आये, पर ये तीन देवता नहीं आये । तीन को छोड़कर बाकी सब देवताओं को आया देखकर दक्ष प्रसन्न हो गये । बोले - कोई बात नही, करोड़ों देवता आये हैं, अब अगर तीन नहीं भी आये, तो कोई खास बात नहीं है । अब उस अभागे के विषय में क्या कहा जाय ?
          ........आगे कल .......

No comments:

Post a Comment