.....कल से आगे .....
जिस बारात का स्वागत करना हो, वह बारात बड़ी ठाठदार हो और पता लगे कि बारात तो पूरी आ गयी है, पर केवल तीन ही लोग नहीं आये हैं । कौन-कौन ? बस, केवल दूल्हा, उसके पिता और बड़े भाई नहीं आये, बाकी सभी बाराती आ गये हैं । अब ऐसी बारात, जिसमें दूल्हा न हो, वह बारात स्वागत करने योग्य है क्या ? इसका अभिप्राय यह है कि ये तीनों देवता तो यज्ञ के तीन प्रमुख अंग हैं । ब्रह्मा विधि हैं, शंकर विश्वास हैं और विष्णु यज्ञपुरुष हैं । तो क्या यह सही अर्थों में यज्ञ है ? दक्ष ने शंकर को नहीं बुलाया, इसलिए शंकर नहीं आये, किन्तु ब्रह्मा और विष्णु क्यों नहीं आये ? विधि और यज्ञपुरुष क्यों नहीं आये ? जो अविवेकी मर्यादावादी होते हैं, वे केवल कर्मकांड को ही विधि समझ बैठते हैं । वास्तव में विधि क्या है ? विश्वास ही सबसे बड़ी विधि है । भगवान शंकर विश्वास हैं । उनको सबसे पहले बुलाना चाहिए । अगर आपको यज्ञ में विश्वास नहीं है, तो आप कर्मकांड के सारे नियमों का चाहे कितनी भी सावधानी से पालन करें, आपको उस कार्य में सिद्धी नहीं मिलेगी ।
जिस बारात का स्वागत करना हो, वह बारात बड़ी ठाठदार हो और पता लगे कि बारात तो पूरी आ गयी है, पर केवल तीन ही लोग नहीं आये हैं । कौन-कौन ? बस, केवल दूल्हा, उसके पिता और बड़े भाई नहीं आये, बाकी सभी बाराती आ गये हैं । अब ऐसी बारात, जिसमें दूल्हा न हो, वह बारात स्वागत करने योग्य है क्या ? इसका अभिप्राय यह है कि ये तीनों देवता तो यज्ञ के तीन प्रमुख अंग हैं । ब्रह्मा विधि हैं, शंकर विश्वास हैं और विष्णु यज्ञपुरुष हैं । तो क्या यह सही अर्थों में यज्ञ है ? दक्ष ने शंकर को नहीं बुलाया, इसलिए शंकर नहीं आये, किन्तु ब्रह्मा और विष्णु क्यों नहीं आये ? विधि और यज्ञपुरुष क्यों नहीं आये ? जो अविवेकी मर्यादावादी होते हैं, वे केवल कर्मकांड को ही विधि समझ बैठते हैं । वास्तव में विधि क्या है ? विश्वास ही सबसे बड़ी विधि है । भगवान शंकर विश्वास हैं । उनको सबसे पहले बुलाना चाहिए । अगर आपको यज्ञ में विश्वास नहीं है, तो आप कर्मकांड के सारे नियमों का चाहे कितनी भी सावधानी से पालन करें, आपको उस कार्य में सिद्धी नहीं मिलेगी ।
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