दण्डकारण्य में चौदह हजार राक्षस जब अकेले श्रीराम के ऊपर आक्रमण कर देते हैं तो ये कोटि-कोटि देवता सब कहाँ चले गये थे ? ये सब राक्षस तो देवताओं के शत्रु हैं, उन्हें तो भगवान राम की सहायता के लिए तुरन्त आना चाहिए था । और यदि आध्यात्मिक दृष्टि से देखें तो ये चौदह हजार राक्षस यदि दुर्गुण-दुर्विचार हैं तो समस्त देवता सद्गुण-सद्विचार हैं । और जहाँ दुर्गुण-दुर्विचार को मिटाने का प्रश्न हो, वहाँ तो सद्गुण-सद्विचार की सशक्त भूमिका होनी चाहिए । पर उनका तो कहीं पता ही नहीं । इसका तात्पर्य क्या है ? यह एक आध्यात्मिक सत्य है । सद्गुण-सद्विचार अपने आप में भले ही अच्छे हों, पर वे दुर्गुणों-दुर्विचारों को मिटाने सक्षम नहीं हैं ।
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