Thursday, 11 August 2016

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच .........

लंका का युद्ध समाप्त हो जाने के बाद श्रीराघवेन्द्र ने लक्ष्मणजी से पूछा - अयोध्या से लेकर लंका तक तुमने बहुत लम्बी यात्रा की । इस सारी यात्रा में तुम्हें सबसे अधिक आनन्द कब आया ? लक्ष्मणजी ने कहा - महाराज ! जागते हुए तो मैंने बहुत-सी यात्रा की । पर सोये-सोये जो यात्रा हुई उसमें ही सबसे अधिक आनन्द आया । कब ? जब सन्त ने अपनी गोद में उठाकर मुझे आपकी गोद में पहुँचा दिया तब । भगवान और सन्त का सम्बन्ध यही है । हनुमानजी लक्ष्मणजी को अपनी गोद में उठाकर ले गये और भगवान की गोद में रख दिया । लक्ष्मणजी बोले - महाराज ! कैसी विलक्षण थी यह यात्रा ! एक पग भी नहीं चलना पड़ा और आपकी गोद में आया तब मुझे एक नया सुख मिला । शेष के रूप में आपको अपनी गोद में सुलाने का सुख तो मिला था, पर आपकी गोद में सोने का जो सुख है, वह तो मुझे हनुमानजी की कृपा से ही मिला है ।

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