Sunday, 7 August 2016

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच .......

ज्ञान के सामने समस्या है स्वरूप विस्मृति की और भक्ति के सामने संशय की । और इसके निराकरण की भूमिका है हनुमानजी की । भगवान राम ने हनुमानजी को काम सौंपा कि जाकर सीताजी को मेरा संदेश सुनाओ । हनुमानजी ने लंका में जाकर क्या किया ? जिस संशय के कारण भक्ति भगवान से दूर हो गयी थी, उस संशय को हनुमानजी ने भगवान की कथा की दिव्य औषधि के द्वारा दूर किया । रामकथा के विषय में गोस्वामीजी ने बताया कि इसके अनेक रूप हैं और उनमें से एक रूप वैद्य का भी है ।
     सद्गुर ग्यान विराग जोग के ।
     बिबुध बैद भव भीम रोग के ।।
- भगवान की कथा ज्ञान, वैराग्य और योग के लिए सद्गुरु है, और संसाररुपी भयंकर रोग का नाश करने के लिए देवताओं के वैद्य  (अश्विनीकुमार) के समान है । तो हनुमानजी ने भगवान की यह सुन्दर कथा श्रीसीताजी को सुनायी जो स्वयं वैद्य भी है और औषधि भी । कथा सुनकर पहले तो माँ के ह्रदय का दुख दूर हो गया, शान्ति की अनुभूति हुई और अन्त में उनके मन में जो संशय था, वह दूर हो गया ।
       रामचन्द्र गुन बरनैं लागा ।
       सुनतहिं सीता कर दुख भागा ।।

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