जहाँ ज्ञान भ्रम के पीछे, प्रलोभन के पीछे भाग गया, वहाँ परिणाम क्या हुआ ? ज्ञान-भक्ति-वैराग्य तीनों ही संकट में पड़ गए । अब इस संकट से उन्हें उबारता कौन है ? तो यहाँ पर संकट से उबारने वाले हनुमानजी की भूमिका आती है । हनुमानजी कौन हैं ? हनुमानजी प्रबल वैराग्य हैं । एक ओर तो वैराग्य लक्ष्मणजी के रूप में जीवन से दूर चला गया और ज्ञान-भक्ति संकट में पड़ गए । दूसरी ओर इस ज्ञान-भक्ति के दुख को दूर करने की भूमिका वैराग्य के द्वारा ही पूर्ण होती है । हनुमानजी की भूमिका क्या है ? वे ज्ञान के संकट को दूर करने वाले, भक्ति के संकट को दूर करने वाले और इन बिछुड़े हुए सबको मिलाने वाले हैं । जिन दुर्गुणों-दूर्विचारों के कारण ज्ञान-भक्ति-वैराग्य साथ रहते हुए भी अलग-अलग दिखाई दे रहे हैं, सीताजी दूर चली गयी हैं, भगवान राम विलाप करते हुए वन में चारों ओर भटक रहें हैं और लक्ष्मणजी साथ होते हुए भी भगवान राम को सान्त्वना नहीं दे पा रहें हैं, अब उन कारणों को दूर करते हैं हनुमानजी ।
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