Monday, 16 January 2017

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच .......

गीता में बड़ी सांकेतिक बात आती है । आज तक यह विवाद चल रहा है कि गीता का प्रतिपाद्य क्या है ? कुछ लोग कहते हैं कि 'ज्ञानयोग', कुछ लोग कहते हैं 'कर्मयोग' तथा कुछ लोगों की मान्यता है कि 'भक्तियोग' । और यदि ढूँढ़ने चलें तो तीनों के समर्थन में वाक्य मिलेंगे । इससे तो यही लगता है कि गीता में भगवान ने तीनों योगों का वर्णन किया है । वैसे यह तो ठीक ही है कि भगवान ने तीनों योगों का प्रतिपादन किया, क्योंकि भगवान जो उपदेश देते हैं वह किसी व्यक्ति के लिए नहीं है । भले ही वह किसी व्यक्ति को निमित्त बनाकर दिया जा रहा है । किन्तु भगवान जो उपदेश देते हैं वह सर्वकालिक है, सार्वदेशिक है और सार्वजनीन है और जब सबके लिये है तो यह स्वाभाविक है कि उसमें समस्त योगों का वर्णन होगा ।

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