जब हमारे जीवन में साधन करते हुए भी लाभ न मिल रहा हो, तो हमें यह पता लगाना चाहिए कि हमने सही मार्ग का, सही साधन का चुनाव किया है कि नहीं । तथा साधन के लिए जो बातें होनी चाहिए उनका हम ठीक-ठीक पालन कर रहे हैं कि नहीं । अगर दोनों बातों का ध्यान हम रख रहे हैं तो ऐसा हो ही नहीं सकता कि व्यक्ति को साधना के बाद सफलता न मिले । इस सन्दर्भ में वह व्यंग्यात्मक गाथा आपने अवश्य सुनी होगी जिसमें यह बताया गया है कि किसी व्यक्ति ने सोचा कि रात्रि में नौका चलाकर यात्रा करेंगे तो बड़ा आराम रहेगा क्योंकि उस समय धूप नहीं रहेगी इसलिए शीतलता तथा शांति में यात्रा होगी । बेचारा रात्रि में नाव पर बैठा और रातभर नाव खेता रहा । सुबह हुई तो उजाले में देखा कि रात्रि को जहाँ से चले थे वहीं पर हैं । बड़ा आश्चर्य हुआ उसे, उसने सोचा कि मैंने इतने घण्टे नाव खेई, मुझे तो काफी दूरी पर होना चाहिए था, परन्तु क्या हुआ ? तो किसी बुद्धिमान व्यक्ति ने बताया कि भलेमानुष ! तुम नाव तो खेते रहे पर लंगर हटाया ही नहीं । इस तरह तो जिन्दगी भर भी नाव खेते रहो फिर भी जहाँ के तहाँ ही रहोगे । ठीक यही बात साधन के सम्बन्ध में भी है ।
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