Wednesday, 25 January 2017

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच ......

रावण के मन जब यह प्रश्न आया कि राम मनुष्य हैं अथवा ईश्वर । उस समय उसे गुरु के पास जाकर यह संशय उनके समक्ष रखना चाहिए था, क्योंकि गुरु का वरण ही संशय को दूर करने के लिए किया जाता है । पर रावण सन्देह उत्पन्न होने के बाद शंकर जी के पास नहीं गया । रावण से किसी ने पूछा कि तुम शंकर जी के पास क्यों नहीं जाते ? तो रावण ने कहा कि अब क्या दस सिर वाला, पाँच सिर वाले से ही पूछेगा ? - तो फिर गुरु क्यों बनाया ? - तो उसने कहा - भाई ! गुरु बनाना चाहिए इसलिए मैंने भी गुरु बना लिया । कुछ लोग गुरु बनाने के लिए ही गुरु बनाते हैं कि बहुत सी वस्तुओं के साथ गुरु भी होना चाहिए । और गुरु जितना प्रसिद्ध हो उतना ही बढ़िया है ऐसा मानकर गुरु बनाते हैं । रावण ने गुरु का वरण किया पर शंकर जी के वचनों पर विश्वास नहीं किया, गुरु की दवा का सेवन नहीं किया, और उसके जीवन में निरन्तर कुपथ्य ही दिखायी दे रहे हैं । इसलिए रावण के जीवन में निरन्तर दोषों की वृद्धि होती गयी ।

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