Saturday, 28 January 2017

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच .......

रामायण में एक ओर तो हनुमान जी जैसे ब्रह्मचारी से लेकर सुग्रीव तक भगवान के राम के सेवक हैं तथा दूसरी ओर अगर चित्रकूट के संदर्भ में विचार करके देखेंगे तो आपको दिखायी देगा कि भगवान श्रीराघवेन्द्र जब चित्रकूट की ओर यात्रा कर रहे हैं तब उनके साथ लक्ष्मण जी और जनकनन्दिनी श्री सीता जी हैं । उसके पश्चात जब श्री भरत जी चित्रकूट की ओर यात्रा करते हैं तब अयोध्या के नागरिक श्री भरत जी के साथ चित्रकूट जाते हैं । और उन पात्रों में भरत जी के साथ-साथ कैकेयी जी भी हैं । यद्यपि कैकेयी जी संदर्भ में बड़ा मतभेद है । कई लोग यदि उन्हें प्रशंसा की दृष्टि से देखते हैं तो कई लोग उनकी बड़ी कठिन शब्दों में निन्दा करते हैं । रामायण में भगवान श्रीराम कैकेयी जी प्रशंसा करते हैं किन्तु श्री भरत जी उनकी निन्दा करते हैं । और यह जो प्रशंसा अथवा निन्दा है वह व्यक्ति की अलग-अलग दृष्टि पर निर्भर है ।

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