गोस्वामीजी कहते हैं कि पहले आप साधन का निर्णय कर लीजिए । लेकिन साधन का निर्णय कैसे होगा बस यह बात सबसे महत्वपूर्ण है । मान लीजिए एक व्यक्ति ऐसे गाँव का रहने वाला हो जिस गाँव में पहुँचने के लिए सड़क नहीं है और वहाँ पर बैलगाड़ी ही यात्रा का एकमात्र साधन है । पर कहीं भाषण में वह व्यक्ति हवाई जहाज की महिमा सुन ले और महिमा को सुनकर यदि वह निर्णय करे कि हम हवाई जहाज में ही यात्रा करेंगे, तो फिर वह व्यक्ति जीवन में यात्रा कभी नहीं कर पायेगा । उसे तो हवाई जहाज की महिमा को दूर ही रखना चाहिए तथा बैलगाड़ी का महत्व समझना चाहिए । उसकी यात्रा का प्रारंभ तो बैलगाड़ी से ही होगा, क्योंकि वह जहाँ रहता है वहाँ बैलगाड़ी ही सुलभ है । अधिकांश लोगों के जीवन में समस्या यह होती है कि वे ऊँची बात सुनते अथवा ग्रन्थों में पढ़ते हैं तो उनमें से जो बात बहुत ऊँची लगती है वे उसी को अपने जीवन में उतारना चाहते हैं । कई लोग तो पूछते हैं सबसे ऊँची बात क्या है ? मैं कहूँगा कि आप यह पता बिल्कुल मत लगाइए कि सबसे ऊँची बात क्या है, अपितु आप यह पता लगाने की चेष्टा कीजिए कि हमारे लिए सबसे ऊँची बात क्या है ? आप कहाँ हैं, सबसे पहले इस पर आप विचार कीजिए । क्योंकि आप जहाँ बैठे हुए हैं वहीं से साधना प्रारंभ कीजिए ।
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