Tuesday, 3 January 2017

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच ......

हनुमान जी महाराज को ईर्ष्या के रूप में सिंहिका मिली, तो उन्होंने उसे क्यों मार डाला ? हनुमान जी आकाश मार्ग से जा रहे हैं, ऊपर उठ रहे हैं, तो इसमें सिंहिका की कोई हानि नहीं है । लेकिन सिंहिका ने हनुमान जी को ज्योंही ऊपर आते हुए देखा त्योंही उसने अपने स्वभाव के अनुसार हनुमान जी को ऊपर से नीचे गिराने का निर्णय लिया । तो दूसरे के पतन से जो प्रसन्न हो तथा दूसरे को खाकर जिसके महत्वकांक्षा की पूर्ति हो ऐसी जो ईर्ष्या है वह समाज का कल्याण नहीं कर सकती । क्योंकि वह व्यक्ति को आगे बढ़ने की प्रेरणा नहीं देती वरन बढ़ते हुए व्यक्ति को गिराने की प्रेरणा देती है ।

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