जब सुग्रीव ने भगवान राम को आते देखा तो सुग्रीव तो बेचारे बड़े ही भयभीत स्वभाव के थे । वे हनुमान जी से कहने लगे कि उन दोनों राजकुमारों को देखो । मुझे तो लग रहा है कि बालि ने इन दोनों को मुझे मारने के लिए भेजा है । परन्तु आप वेष बदलकर यह पता लगाइए कि ये कौन है ? सुग्रीव का तात्पर्य था कि हनुमान जी आपकी तो यह विशेषता है कि आप मनचाहा वेष बदल सकते हैं । यद्यपि हनुमान जी को छोड़कर अन्य बन्दरों में यह चमत्कार नहीं है, पर हनुमान जी के ज्ञान की विशेषता है कि जिस समय व्यवहार में जिस रूप की आवश्यकता होती है, हनुमान जी वही रूप बना लेते हैं । पर किसी रूप विशेष को हनुमान जी पकड़े नहीं रहते । इस दृष्टि से भी विचार करके देखेंगे तो आपको लगेगा कि हनुमान जी कहीं छोटे बन जाते हैं, कहीं अत्यंत बड़े बन जाते हैं, कहीं बहुत भारी बन जाते हैं और कहीं हल्के बन जाते हैं । इसका अभिप्राय है कि जिसके जीवन में किसी वस्तु का अभिमान आ जाता है, वह सदा वही बना रहना चाहता है । पर जिसके जीवन में किसी वस्तु की पकड़ नहीं है, वह जिस समय जिस वस्तु की आवश्यकता देखता है, वही बन जाता है । पर बन जाने के बाद भी वह उससे बंधता नहीं है ।
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