भगवान राम दूल्हे के रूप में जब घोड़े की पीठ पर बैठे तो किसी ने जानना चाहा कि यह घोड़ा कौन है ? तो गोस्वामीजी ने कहा कि आज तो ऐसा लग रहा है, जैसे काम ही घोड़ा है और उस काम के अश्व रथ पर भगवान राम आसीन हैं । और जब हनुमान जी की पीठ पर बैठे, तो किसी ने मानो जानना चाहा कि हनुमान जी तो भगवान शंकर के अवतार हैं तथा शंकर जी कामारि हैं । तो क्या आपके लिए यह काम और कामारि दोनों बराबर हैं, जो काम के कन्धे पर भी सवार होते हैं तथा कामारि के कन्धे पर भी आरूढ़ हो जाते हैं । प्रभु ! दोनों पर आरूढ़ होने का क्या अभिप्राय है ? भगवान ने कहा - नहीं भाई ! यद्यपि दोनों की पीठ पर मैं सवार था पर एक अन्तर था । क्योंकि जब मैं काम की पीठ पर बैठा तो लगाम पकड़ ली पर कामारि के कन्धे पर बैठते समय किसी लगाम की आवश्यकता नहीं रह गयी । इसका अभिप्राय है कि भगवान दोनों रुपों में ही व्यक्ति को स्वीकार करते हैं ।
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