अयोध्या में राज्याभिषेक के पश्चात भगवान राम बन्दरों से कहते हैं - तुम घर जाओ । बन्दरों ने कहा - महाराज ! यह तो आप ऊपर से नीचे उतार रहे हैं । क्योंकि घर से अयोध्या जायँ यह तो उन्नति हुई पर अगर अयोध्या से लौटकर घर चले गये, तब तो ऊपर से नीचे उतर जायेंगे । भगवान राम ने कहा - नहीं, हम तुम्हें ऊपर से नीचे नहीं ले जा रहे हैं, अपितु तुम्हें और भी ऊपर पहुँचा रहा हूँ । भगवान ने कहा - मित्रों ! विद्यार्थी जब पढ़ता है, तब उसकी परीक्षा तो साल में ही होती है । तुम लोगों ने भी इतने लम्बे समय तक जो पाठ पढ़ा है, मैं भी उसकी परीक्षा ले रहा हूँ । इसीलिए दोहे में जो शब्द है उसे देखिए - *अब गृह जाहु सखा सब भजेहु मोहि दृढ़ नेम ।* - तुम्हारी परीक्षा तो तब होगी । क्योंकि यहाँ पास में रहकर अगर मेरी याद रहे, तो काहे की याद है । इस याद को मैं याद नहीं मानता । तुम्हारी दृढ़ता की परीक्षा तो तभी है जब कि शरीर से दूर जाने पर भी याद बनी रहे । वस्तुतः मैं देखना चाहता हूँ कि घर में जाकर भी तुम मेरी स्मृति में डूबे रहते हो कि नहीं ? भगवान ने कहा - अब तो तुम्हारी भक्ति और भी व्यापक हो गयी । क्योंकि अभी तक तुम अयोध्या में थे, मैं भी यहीं था और तब तुम मेरी सेवा कर रहे थे । पर अब तुम घर में जाकर जब मेरी भक्ति करोगे, तब प्रत्येक देश अयोध्या बन जायेगा, प्रत्येक काल त्रेता बन जायेगा और संसार का प्रत्येक व्यक्ति मेरा रूप बन जायेगा । यही समझकर तुम सबकी सेवा करो ।
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