Friday, 31 March 2017

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच .......

भगवान श्रीराघवेन्द्र ने महर्षि भरद्वाज के चरणों में प्रणाम किया और बड़ी ही विनम्रता से अपनी जिज्ञासा प्रकट करते हुए कहा कि आप मुझे बतायें कि मैं किस मार्ग से जाऊँ ? भगवान श्रीराम का प्रश्न सुनकर महर्षि मन ही मन हँसे और सबसे पहले उन्होंने यही कहा कि मैं तुम्हारे लिए कौन सा मार्ग बताऊँ ? क्योंकि तुम्हारे लिए तो सभी मार्ग सुगम हैं । किन्तु भगवान राम की जिज्ञासा तथा महर्षि के द्वारा कहा जाने वाला यह वाक्य कि सभी मार्ग तुम्हारे लिए सुगम हैं, इसके पीछे सुगम और अगम का बड़ा ही अनोखा सूत्र विद्यमान है । कभी-कभी व्यक्ति के मन में यह जिज्ञासा होती है कि कौन सा मार्ग सुगम है और कौन सा अगम है । कौन सा मार्ग कठिन है और कौन सा सरल है । और कहीं-कहीं यह भी आग्रह मिलता है कि अमुक मार्ग अत्यंत सरल है । परन्तु इस समस्या का समाधान भगवान राम अपने चरित्र के द्वारा बड़े ही अद्भुत ढंग से देते हैं ।

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