Thursday, 9 March 2017

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच ......

भगवान राम के यद्यपि बहुत से मित्र रहे होंगे, पर रामायण में उनके तीन मित्र प्रसिद्ध हैं, उन पर जरा दृष्टि डालिये । भगवान श्रीराघवेन्द्र के एक मित्र हैं - निषादराज, दूसरे मित्र हैं सुग्रीव जी और प्रभु के तीसरे मित्र हैं - विभीषण जी । और इस मित्रता में विलक्षणता यह है कि ये तीनों ही व्यक्ति सर्वथा भिन्न-भिन्न चरित्र और भिन्न-भिन्न स्वभाव वाले हैं । पर भगवान तीनों को मित्रों का सम्मान देते हैं । अगर भगवान चुनाव करते हुए इनमें से एक को बड़ा पद देते और दूसरे को छोटा तब तो ऐसा लगता कि भगवान ने योग्यता तथा चरित्र देखकर उन्हें अलग-अलग पद दिया । पर ऐसा नहीं हुआ । अपितु भगवान श्रीराघवेन्द्र ने तो तीनों को ही मित्र कहकर पुकारा । यद्यपि तीनों की मनःस्थिति की दृष्टि से बहुत भिन्नता है ।

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