विश्वामित्र जी के यज्ञ की रक्षा करने के बाद भगवान राम की विदेह नगर की यात्रा होती है, जो ज्ञान योग का मार्ग है । फिर अयोध्या से आगे बड़ी लम्बी यात्रा होती है । जिस यात्रा में कभी जल मार्ग की यात्रा होती है जब केवट की नाव पर बैठकर गंगा पार करते हैं । कभी पैदल चित्रकूट की यात्रा पूरी करते हैं । कहीं रथ पर बैठकर भगवान राम चले । कहीं घोड़े पर बैठकर भगवान राम ने यात्रा की । रावण को हराकर जब लौटे तो पुष्पक विमान पर बैठकर यात्रा की । भगवान राम कभी जल मार्ग से कभी थल मार्ग से तो कभी नभ मार्ग से यात्रा करते हैं । कभी नदी को पार करते हैं, कभी समुद्र को पार करते हैं, कभी पर्वत को पार करते हैं और कभी वन को पार करते हैं । इसका आध्यात्मिक अभिप्राय है कि जीवन में यही विविध मार्ग हैं और इन मार्गों में जो समस्याएँ आती हैं, भगवान राम ने प्रत्येक समस्या को स्वीकार किया, तथा प्रत्येक समस्या का समाधान किया । भगवान राम अपने चरित्र के द्वारा कर्म योग, ज्ञान योग और भक्ति योग आदि सभी मार्गों की शिक्षा देते हैं ।
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