गोस्वामीजी के राम कभी पुराने नहीं होते । वे ईश्वर हैं तो पहले भी रहे, आज भी हैं और भविष्य में भी रहेंगे । और जब राम हैं तो उनके साथ तुलसीदासजी भी हैं । गोस्वामीजी भगवान राम की कथा से 'रामचरितमानस' ग्रन्थ से, मन की समस्याओं का इसीलिए समाधान देने में सक्षम हुए क्योंकि मन भी किसी देश की सीमा में बँधा हुआ नहीं है, किसी काल की सीमा में बँधा हुआ नहीं है । प्रत्येक व्यक्ति के पास मन होता है । भिन्न-भिन्न काल में, भिन्न-भिन्न देशों में पैदा होनेवाले व्यक्तियों के मन का स्वरूप क्या भिन्न-भिन्न हो सकता है ? वस्तुतः मन से जुड़ी समस्याएँ और मन की प्रकृति सभी देश और काल में सदा ही उसी रूप में विद्यमान रही हैं जैसी कि आज है । अतः शाश्वत रूप में जो समस्याएँ मन के साथ सम्बद्ध है, उनका समाधान जब तक शाश्वत ईश्वर के साथ जोड़कर नहीं खोजा जाएगा, तब तक जो भी समाधान मिलेगा वह अधूरा रहेगा ।
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