Friday, 20 October 2017

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच .....

यन्त्रों के माध्यम से काम करनेवालों को असावधानी का दुखद अनुभव होते हुए दिखाई देता है । यन्त्रों के द्वारा बड़े-बड़े निर्माण होते हैं, बड़ी अच्छी-अच्छी वस्तुएँ यन्त्र के द्वारा बनाई जाती हैं । पर यदि यन्त्रों का उपयोग करनेवाला थोड़ा-सा भी असावधान हो जाय तो वह उपयोगी यन्त्र उस चालक को ही कुचल सकता है, मार सकता है । महाराज दशरथ अन्त में थोड़ा-सा असावधान हो गए । 'रामराज्य' के निर्माण का उनका संकल्प पूरा नहीं हो सका । बाद में यद्यपि अयोध्या में रामराज्य का निर्माण हुआ, पर इससे पूर्व रामराज्य की स्थापना चित्रकूट में हुई । अयोध्या में बाद में जो रामराज्य बना वह भरतजी के द्वारा बना । 'रामराज्य' का निर्माण चौदह वर्ष के लिए क्यों टल गया ? यह सचमुच एक विचारणीय प्रश्न है । इसका उत्तर साधना और कृपा में जो अन्तर है उसके द्वारा प्राप्त होता है ।

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