Friday, 6 October 2017

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच .......

वर्णन आता है कि जब विभीषणजी आए तो सुग्रीवजी ने विरोध करते हुए कहा कि प्रभु ! यह तो रावण का भाई है, राक्षस है ! न जाने किस उद्देश्य से आया है ! बाल्मीकि रामायण में भगवान राम सुग्रीवजी से कहते हैं कि तुम इसे रावण का भाई बता रहे हो, यदि स्वयं रावण भी आ गया हो तो उसे ले आओ, मैं उसका स्वागत करने के लिए प्रस्तुत हूँ । प्रभु इतने दयालु और उदार हैं कि घोषणा कर देते हैं कि जो कोई भी मेरे सामने आ जाता है उसे साधु बनाना मेरा कार्य है । इस प्रकार सर्वत्र गोस्वामीजी प्रभु की कृपा और उनकी करुणा इन दोनों को सबसे अधिक महत्व देते हैं । इसके पीछे उनका उद्देश्य व्यक्ति को पापी और बुरा बनाना नहीं है, अपितु जो अच्छे हैं उन्हें सन्देश देते हैं कि वे निरभिमानी बनकर अपनी अच्छाइयों का उपयोग करें और दूसरी ओर दोषयुक्त व्यक्ति हैं वे भी निराश न हों ! वे प्रभु के सामने जाकर अपनी असमर्थता का, अपने दोषों का वर्णन कर प्रभु से निवेदन करें कि प्रभु ! आप हमें इनसे छुटकारा दिलवाएँ ! स्वयं को एक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत कर गोस्वामीजी, निराशा से मुक्त कर मानो, हम सबको आश्वस्त करते हैं ।

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