Sunday, 8 October 2017

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच ......

भगवान राम इस धरातल पर त्रेतायुग में अवतरित हुए  यह एक ऐतिहासिक सत्य है । पर हम जानते हैं कि ऐतिहासिक सत्य पुराना पड़ जाता है । समय-समय पर अगणित व्यक्ति आते हैं । अपने समय में उनका नाम होता है, प्रसिद्धि होती है, सम्मान होता है पर बाद में उन्हें भुला दिया जाता है । कुछ लोग कभी-कभी उन्हें भले ही स्मरण कर लें पर जनमानस में वे प्रतिष्ठित नहीं हो पाते । किन्तु हम देखते हैं कि गोस्वामीजी के राम और स्वयं गोस्वामीजी दोनों ही जनजीवन में आज भी विद्यमान हैं और निरन्तर जनमानस को प्रेरित और अनुप्राणित करते रहे हैं । इसके मूल में यही सत्य विद्यमान है कि तुलसी के राम मनुष्य नहीं, ईश्वर हैं ।

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