Monday, 9 October 2017

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच .......

श्री राम को ईश्वर मानने का बहुत बड़ा लाभ है । मनुष्य मान लेने पर वे जितने सीमित हो जाते हैं, ईश्वर मान लेने पर वे उतने ही असीम हो जाते हैं । मनुष्य एक काल में होता है, एक देश में होता है । इस तरह वह देश-काल की सीमा से घिरा हुआ होता है । पर ईश्वर सदा-सर्वदा-सर्वत्र विद्यमान होता है । ईश्वर के लिए न तो काल की सीमा है और न ही देश की । गोस्वामीजी ने इसी विशेषता का आनन्द और लाभ लिया । उन्होंने कहा कि राम ईश्वर होते भी मनुष्य के रूप में अवतार लेते हैं और मनुष्य की भाँति आचरण करते हैं । इसमें हमें दोहरा लाभ मिलता है कि उन्हें हम मनुष्य के रूप में देखकर उनके चरित्र का अनुकरण करने का यत्न करें और जब चाहकर भी ऐसा न कर सकें, असमर्थता का अनुभव करें तो उन्हें ईश्वर के रूप में स्मरण करें और उनसे यही प्रार्थना करें कि 'प्रभु ! आप ही हमें वह शक्ति प्रदान करने की कृपा करें कि जिससे आपके आदर्शों को हम अपने जीवन में क्रियान्वित कर सकें ।

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