Wednesday, 11 October 2017

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच .....

गोस्वामीजी ने मन से जुड़ी समस्याओं को अपने जीवन में भोगा, झेला और फिर उनका समाधान जिस पद्धति से प्राप्त किया, उन सबका वर्णन उन्होंने 'रामचरितमानस' और 'विनयपत्रिका' आदि अपने ग्रन्थों में किया है । गोस्वामीजी जानते हैं कि व्यक्ति का 'मन' ही समस्याओं का केन्द्र है । मन जिससे जुड़ जाता है, वह उसी का रूप ग्रहण कर दुख-सुख की सृष्टि कर लेता है । वस्तुतः मन को किससे जोड़कर उसे स्वस्थ रखा जा सकता है, 'रामचरितमानस' में गोस्वामीजी इसी का संकेत अनेकानेक सूत्रों के द्वारा करते हैं । और भगवान राम के सनातन और शाश्वत चरित्र एवं कथा के माध्यम से वे मन की शाश्वत समस्याओं का समाधान प्रदान करते हैं ।

No comments:

Post a Comment