Thursday, 12 October 2017

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच ......

आगम शास्त्र में यन्त्रों के निर्माण में त्रिकोण का बड़ा महत्व है । किसी भी देवता के यन्त्र में एक सबसे भीतर भी एक त्रिकोण होता है जिसके केन्द्र में एक बिन्दु होता है और उस केन्द्रबिन्दु में स्थित उस देवता की उपासना की परम्परा आगम शास्त्र में देखी जाती है । गोस्वामीजी के जीवन में भी हमें पुण्यभूमि - अयोध्या, काशी और चित्रकूट के रूप में एक त्रिकोण दिखाई देता है जिसके मध्य में, केन्द्रबिन्दु में भगवान श्री सीताराम का सम्मिलित स्वरूप उनके आराध्य तत्व के रूप में दिखाई देता है ।

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