'रामचरितमानस' के अन्त में रामकथा के बाद गोस्वामीजी सबको निमंत्रण देते हुए कहते हैं कि मानस की पाँच सौ चौपाइयों को जो सुनेंगे, समझेंगे और ह्रदय में धारण करेंगे तो सारी समस्या, सारे दुःखों के मूल में जो अविद्या जनित पंच विकार (अविद्या, अस्मिता, अभिनिवेश, राग और द्वेष) हैं, प्रभु राम उनको दूर करेंगे । सचमुच ये बड़े दारुण हैं और सभी समस्याएँ इन पाँचों के द्वारा ही उत्पन्न होती हैं । श्री भरतजी भी यही कहते हैं ।
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