Monday, 23 October 2017

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच ......

कृपामय प्रभु ने चित्रकूट की भूमि में गोस्वामीजी को दर्शन दिया । सुन्दर बालक के रूप में तथा एक वीर शिकारी के रूप में, वे प्रभु के वहाँ दर्शन प्राप्त करते हैं । वहीं वे हनुमानजी के संकेत पर प्रभु को पहिचानते हैं और धन्य हो जाते हैं । 'विनयपत्रिका' में वे स्वयं इस बात का उल्लेख करते हैं । तुलसीदासजी ने चित्रकूट में भगवान को प्राप्त किया । यहीं उनका पुनर्जन्म होता है अतः चित्रकूट ही उनकी वास्तविक जन्मभूमि है । गोस्वामीजी भूलकर भी राजापूर का नाम नहीं लिखते । चित्रकूट ऐसी भावभूमि है जहाँ कोल-किरात, पशु-पक्षी सभी प्रभु को प्राप्त कर लेते हैं और इसीलिए तुलसी-जैसा असमर्थ भी वहाँ उनको प्राप्त कर सकता है । ऐसा दिव्य भाव गोस्वामीजी का चित्रकूट के प्रति है ।

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